- Get link
- X
- Other Apps
मालकिन बोली 'मत छà¥à¤“', पर जिसà¥à¤® की पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ थीं
put your ad code here
Part 1
5
Click "Next"👉
रघॠहर सà¥à¤¬à¤¹ की तरह जलà¥à¤¦à¥€ उठकर रसोई में पहà¥à¤‚चा था, लेकिन आज कà¥à¤› अलग था। उसकी मालकिन, सौमà¥à¤¯à¤¾ जी, हलà¥à¤•े गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¥€ रंग की साड़ी में बालों को खोले रोटियां बेल रही थीं। साड़ी का पलà¥à¤²à¥‚ बार-बार कंधे से सरक रहा था, और हर बार वो उसे बेपरवाही से ठीक कर रही थीं। रघॠकी नज़रें खà¥à¤¦-ब-खà¥à¤¦ खिंचती चली गईं। वो कोई आम नौकर नहीं था – तीन साल से इस हवेली में था और हर दिन सौमà¥à¤¯à¤¾ को देखकर उसकी चाहत और गहराती जा रही थी।
put your ad code here
Add Your Monetag Ads Here
put your ad code here
Part 2
4
Click "Next"👉
वो धीरे से उनके पास गया और मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ बोला, "मालकिन, रोटी तो आप बेलती हैं, मगर आज तो आग कà¥à¤› और ही जल रही है इस चूलà¥à¤¹à¥‡ में।†सौमà¥à¤¯à¤¾ ने पलटकर उसकी ओर देखा, उसकी आंखों में पहली बार कà¥à¤› चमक सी थी – न नाराज़गी, न हैरानी, बस à¤à¤• मौन सà¥à¤µà¥€à¤•ृति। रघॠने आà¤à¤š धीमी की और धीरे से कहा, “इतनी गरà¥à¤®à¥€ तो तवे में à¤à¥€ नहीं होती, जितनी आपके पास आने पर लगती है।
put your ad code here
Add Your Monetag Ads Here
put your ad code here
Part 3
3
Click "Next"👉
सौमà¥à¤¯à¤¾ का हाथ à¤à¤• पल को ठिठक गया। उसने सिर à¤à¥à¤•ाया, लेकिन होठों पर मà¥à¤¸à¥à¤•ान छà¥à¤ª नहीं सकी। “जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बोलना सीख लिया है अब तà¥à¤®à¤¨à¥‡,†वो बोली। रघॠने उसकी साड़ी का पलà¥à¤²à¥‚ जो फिर से कंधे से सरक गया था, धीरे से ठीक करते हà¥à¤ कहा, “सीखा तो आपसे है… हर चीज़ को कैसे छूना है, कैसे संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¤¾ है।†उसके इस सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ में हलà¥à¤•ी तपिश थी, और सौमà¥à¤¯à¤¾ की सांसें à¤à¤¾à¤°à¥€ होने लगीं।
put your ad code here
Add Your Monetag Ads Here
put your ad code here
Part 4
2
Click "Next"👉
रसोई की à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ के साथ-साथ दोनों के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¥€ कà¥à¤› जलने लगा था। सौमà¥à¤¯à¤¾ ने धीरे से आटा गूंथते हà¥à¤ पूछा, “अगर रोटियाठजल गईं तो?†रघॠने उसकी उंगलियों को छूते हà¥à¤ कहा, “तो फिर से गूंथ लेंगे… पर ये मौका अगर हाथ से गया, तो दोबारा नहीं मिलेगा।†सौमà¥à¤¯à¤¾ ने उसकी ओर देखा – उसकी आंखों में अब कोई सवाल नहीं था। बस ताजà¥à¤œà¥à¤¬, चाहत और à¤à¤• दबी हà¥à¤ˆ हिमà¥à¤®à¤¤ थी।
put your ad code here
Add Your Monetag Ads Here
put your ad code here
Part 5
1
Click "Next"👉
अचानक à¤à¤• खामोशी छा गई, जैसे दोनों के बीच सब कà¥à¤› कह दिया गया हो। सौमà¥à¤¯à¤¾ ने आटे से सने हाथों से रघॠका चेहरा छà¥à¤† और धीमे से कहा, “तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ ये बातों की आà¤à¤šâ€¦ बहà¥à¤¤ तेज़ है रघà¥à¥¤â€ रघॠमà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¯à¤¾ और उसके हाथों को अपने होंठों से छà¥à¤†à¥¤ रसोई की दीवारें अब सिरà¥à¤« रोटियों की खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ से नहीं, बलà¥à¤•ि अधूरी खà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¶à¥‹à¤‚ और दबी हà¥à¤ˆ आग से à¤à¤° चà¥à¤•ी थीं। पहली बार दोनों ने उस लकीर को पार किया – जो नौकर और मालकिन के बीच कà¤à¥€ नहीं लांघी जाती।
put your ad code here
Add Your Monetag Ads Here
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment